इप्टा की टीम ने पिरान कलियर दरगाह में मांगी देश में शांति और सौहार्द की दुआ; नुक्कड़ नाटक व कविताओं से दिया शिक्षा और नशाबंदी का संदेश,  टीम का हुआ भव्य अभिनंदन…

तनवीर अली हरिद्वार।

इप्टा की टीम ने पिरान कलियर दरगाह में मांगी देश में शांति और सौहार्द की दुआ; नुक्कड़ नाटक व कविताओं से दिया शिक्षा और नशाबंदी का संदेश,  टीम का हुआ भव्य अभिनंदन…

​रुड़की / पिरान कलियर:

भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) उत्तर प्रदेश की टीम ने विश्व प्रसिद्ध पिरान कलियर दरगाह शरीफ में हाजिरी देकर देश में अमन, शांति, चैन और आपसी सौहार्द की दुआ मांगी। लखनऊ से पधारी उत्तर प्रदेश इप्टा की प्रांतीय उपाध्यक्ष श्रीमती सुमन श्रीवास्तव और वरिष्ठ शायर ओम प्रकाश “नदीम” के नेतृत्व में पहुंची टीम ने दरगाह पर पुष्पांजलि अर्पित कर एक विशेष सामाजिक संदेश दिया।

कविताओं और गीतों से सामाजिक मुद्दों पर दिया संदेश

​पुष्पांजलि अर्पित करने के उपरांत इप्टा की बालिकाओं की टीम ने अपनी प्रभावशाली कविताओं और गीतों के माध्यम से प्रौढ़ शिक्षा, बालिका शिक्षा, नशाबंदी और नफरत के खिलाफ जन-जागरूकता का संदेश दिया।

​कलियर स्थित पीपल-झंडा चौक पर लखनऊ की टीम ने एक संवेदनशील लघु नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक गीतों की प्रस्तुति दी। बालिका शिक्षा की अलख जगाते हुए कन्याओं ने अपने गीतों को स्वर देकर सार्थक प्रेम और ज्ञान का प्रसार किया:

​“ढाई आखर प्रेम के, पढ़ने और पढ़ाते आये हैं।

हम भारत से नफ़रत का हर दाग़ मिटाने आये हैं।”

​तथा

​“शाम से रात के आखरी छोर तक,

ये मशालें जलेंगी यूँ ही भोर तक।”

​700 वर्ष पुराने सद्भावना के संदेश की ज्योति

​इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय शायर एवं उत्तराखंड भाषा संस्थान के उर्दू संकाय के प्रभारी सदस्य अफज़ल मंगलोरी ने कहा, “आज से लगभग 700 वर्ष पूर्व जो सद्भावना, प्रेम और मानवता का संदेश हज़रत साबिर पाक ने दिया था, उसी संदेश की ज्योति को इप्टा की टीम द्वारा पूरे देश में प्रज्वलित किया जा रहा है।”

इप्टा टीम का हुआ भव्य अभिनंदन

​लखनऊ से आई इप्टा की इस टीम में मुख्य रूप से कु. शिवी सिंह, कु. कविता यादव, कु. गरिमा सिंह, कु. आँचल सिंह, कु. सोनी यादव एवं कु. सविता यादव शामिल रहीं।

​दरगाह परिसर पहुँचने पर दरगाह प्रभारी सद्दाम अली, ओम प्रकाश “नूर”, सैयद इंतेखाब, राव शारिक, मो. हारून, राव सिकन्दर, शशि कुमार सैनी, जमशेद जिम्मू और असलम कुरेशी आदि ने इप्टा टीम का स्वागत व अभिनंदन कर उन्हें तबर्रुक (प्रसाद) भेंट किया।

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