पतंजलि योगपीठ में जड़ी-बूटी दिवस के रूप में धूमधाम से मनाया गया आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिन,स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण संग 710 लोगों ने किया रक्तदान; 1500 से अधिक मरीजों का हुआ नि:शुल्क इलाज,

तनवीर अली हरिद्वार।

पतंजलि योगपीठ में जड़ी-बूटी दिवस के रूप में धूमधाम से मनाया गया आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिन,स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण संग 710 लोगों ने किया रक्तदान; 1500 से अधिक मरीजों का हुआ नि:शुल्क इलाज,

  • आयुर्वेद में जो कार्य बड़ी-बड़ी सरकारें और WHO नहीं कर पाए, वह पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ने करके दिखाया: स्वामी रामदेव,
  • 40 नए ग्रंथों का विमोचन और 12 साक्ष्य-आधारित आयुर्वेदिक औषधियों का हुआ लोकार्पण
  • स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण संग 710 लोगों ने किया रक्तदान; 1500 से अधिक मरीजों का हुआ नि:शुल्क इलाज

हरिद्वार। पतंजलि योगपीठ-2 स्थित योगभवन सभागार में पतंजलि योगपीठ के महामंत्री एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिवस ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर संस्थान द्वारा रक्तदान, नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच एवं औषधीय पौधों के वितरण जैसे विभिन्न सेवा कार्यों का आयोजन किया गया।

मैकाले की शिक्षा पद्धति का दौर होगा खत्म

समारोह को संबोधित करते हुए स्वामी रामदेव महाराज ने कहा कि योग, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी और स्वदेशी जीवन पद्धति जल्द ही वैश्विक चिकित्सा पद्धति के रूप में अपनी पहचान बनाएगी। उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 1835 से चली आ रही मैकाले की शिक्षा पद्धति की पराधीनता अब समाप्त होगी और देश के लाखों स्कूलों को ‘भारतीय शिक्षा बोर्ड’ से जोड़ा जाएगा।

रिसर्च बेस्ड आयुर्वेद से मिली नई पहचान

स्वामी रामदेव ने बताया कि पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ने एक हजार से अधिक जड़ी-बूटियों के फिंगर-प्रिंट्स तैयार कर सेल, एनिमल और ह्यूमन ट्रायल के जरिए आयुर्वेद को साक्ष्य-आधारित बनाया है। पतंजलि ने लिवर व किडनी फेलियर, डायबिटीज, बीपी, थायराइड, हार्ट अटैक और जेनेटिक जैसी गंभीर बीमारियों पर रिसर्च आधारित औषधियां तैयार कर प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने कहा कि जो कार्य WHO और विश्व की सरकारें नहीं कर सकीं, वह पतंजलि ने कर दिखाया है।

जन्मदिन संकल्प लेने का दिन: आचार्य बालकृष्ण

इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि जन्मदिन का वास्तविक अर्थ संकल्प लेने से है। पतंजलि पिछले तीन दशकों से इस दिन को जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाता आ रहा है, जिसके तहत संपूर्ण मानवता को रोगमुक्त करने, पौधरोपण और रक्तदान का संकल्प लिया जाता है।

प्रमुख कार्यक्रम एवं उपलब्धियां:

  • 40 नए ग्रंथों का विमोचन: आचार्य बालकृष्ण द्वारा रचित 40 पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिसमें 9-खंडीय ‘वर्ल्ड बॉटनिकल डिक्शनरी’ की 3 पुस्तकें, ‘इंसाइक्लोपीडिया ऑफ हर्बल रेमेडीज’ की 13 पुस्तकें, ‘इंसाइक्लोपीडिया ऑफ इंडियन हर्ब्स’ की 7 पुस्तकें और 140 रिसर्च पेपर्स का संकलन शामिल है।
  • 12 नई औषधियों का लोकार्पण: पतंजलि द्वारा 12 नवविकसित साक्ष्य-आधारित औषधियों (जैसे- हीमोग्रिट वाइटल, रीनोग्रिट, लिवोग्रिट, टमीग्रिट रोल-ऑन आदि) को जनसामान्य के लिए लॉन्च किया गया।
  • रक्तदान व स्वास्थ्य शिविर: स्वामी रामदेव व आचार्य बालकृष्ण सहित लगभग 710 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। इसके अतिरिक्त, पतंजलि इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के तत्वावधान में आयोजित नि:शुल्क शिविर में 1500 से अधिक रोगियों की जांच व दवा वितरण किया गया।
  • पौधरोपण का संकल्प: उपस्थित जनसमूह को पर्यावरण संरक्षण हेतु कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प दिलाया गया तथा नीम, तुलसी, एलोवेरा और आंवला जैसे औषधीय पौधों का नि:शुल्क वितरण हुआ।

​कार्यक्रम में पतंजलि से जुड़े संन्यासी, अधिकारी, शिक्षकगण व विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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