पतंजलि विश्वविद्यालय में ‘राष्ट्रीय स्वर्णशलाका प्रतियोगिता’ का भव्य समापन, मेधावियों को मिली ₹50 लाख की छात्रवृत्ति, युवाओं को शास्त्रों से जोड़ना ही वास्तविक राष्ट्र निर्माण: स्वामी रामदेव…

तनवीर अली हरिद्वार।

पतंजलि विश्वविद्यालय में ‘राष्ट्रीय स्वर्णशलाका प्रतियोगिता’ का भव्य समापन, मेधावियों को मिली ₹50 लाख की छात्रवृत्ति, युवाओं को शास्त्रों से जोड़ना ही वास्तविक राष्ट्र निर्माण: स्वामी रामदेव…

हरिद्वार (2 अगस्त): भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत और शास्त्रीय अध्ययन के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से पतंजलि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय ‘पञ्चमी राष्ट्रीय स्वर्णशलाका प्रतियोगिता’ का भव्य सम्मान समारोह रविवार को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव जी महाराज, कुलपति आचार्य बालकृष्ण जी और उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह आहलूवालिया सहित देश भर के प्रख्यात विद्वान उपस्थित रहे।

​समारोह के दौरान शास्त्रों का कंठस्थ अध्ययन करने वाले और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों के बीच लगभग ₹50 लाख की छात्रवृत्ति एवं पुरस्कार राशि वितरित की गई।

युवाओं को शास्त्रों से जोड़ना ही वास्तविक राष्ट्र निर्माण: स्वामी रामदेव

​अपने प्रेरक उद्बोधन में स्वामी रामदेव ने कहा कि आज देश के सामने युवाओं की दो तस्वीरें दिखाई देती हैं:

“एक ओर ऐसे युवा हैं जो वेद, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता, चरक संहिता और संस्कृत को कंठस्थ कर सनातन ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं; वहीं दूसरी ओर विरोध-प्रदर्शन के नाम पर सड़कों पर अराजकता फैलाने वाले युवा हैं। पतंजलि का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि युवाओं को धर्म, दर्शन और संस्कारों से जोड़कर राष्ट्र का आदर्श नागरिक बनाना है।”

 

संस्कृति और चरित्र निर्माण का आधार हैं शास्त्र: न्यायमूर्ति आहलूवालिया

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह आहलूवालिया ने पतंजलि योगपीठ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज जब पूरी दुनिया भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर आकर्षित हो रही है, ऐसे समय में पतंजलि विश्वविद्यालय सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का ऐतिहासिक कार्य कर रहा है। शास्त्रों का अध्ययन केवल ज्ञान प्राप्ति का जरिया नहीं, बल्कि चरित्र और राष्ट्र निर्माण का आधार है।

देशभर से आए मेधावी हुए सम्मानित

​31 जुलाई से शुरू हुई इस प्रतियोगिता में पतंजलि विश्वविद्यालय, पतंजलि गुरुकुलम्, पतंजलि कन्या गुरुकुलम्, पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज, स्वामी दर्शनानन्द गुरुकुल महाविद्यालय, आचार्यकुलम् (हरिद्वार, राँची, चिरगाँव, कुमारी कटरा) और देवप्रयाग सहित देश के विभिन्न गुरुकुलों व शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

  • राष्ट्रीय स्तर के सर्वोच्च विजेता: वेदभानु, साध्वी देववाणी, साध्वी देवांशी, कृष्णाशीष, जाह्नवी, अधिता, राशि, अंजलि, साक्षी तथा गौरिका।
  • संस्थागत स्तर के प्रमुख विजेता: दत्तात्रेय, आदर्श, ज्योति, देवार्पणा, ओजस, अधित, साध्वी देवदीक्षा, साध्वी देवनिधि, साध्वी देवसिद्धि, साध्वी देवस्मृति, निशा एवं देव कल्याणी।

उल्लेखनीय उपस्थिति

​मानविकी संकाय की अधिष्ठाता साध्वी डॉ. देवप्रिया जी ने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य रोजगार के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को जगाना है। समारोह में प्रो-वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) मयंक अग्रवाल, डीन रिसर्च डॉ. ऋत्विक बिसारिया, परीक्षा नियंत्रक श्री ए. के. सिंह सहित विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, शिक्षक और शोधार्थी उपस्थित रहे।

You may have missed