अल्मोड़ा की बुजुर्ग महिला से 1.20 करोड़ की ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी: STF एसएसपी अजय सिंह के निर्देश पर मालदा से मुख्य आरोपी गिरफ्तार…

तनवीर अली हरिद्वार।

अल्मोड़ा की बुजुर्ग महिला से 1.20 करोड़ की ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी: STF एसएसपी अजय सिंह के निर्देश पर मालदा से मुख्य आरोपी गिरफ्तार

अल्मोड़ा/देहरादून:

उत्तराखंड एसटीएफ (STF) के साइबर थाना कुमाऊं परिक्षेत्र की पुलिस टीम ने 1 करोड़ 20 लाख 18 हजार रुपये की डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। एसटीएफ की टीम ने मामले के मुख्य अभियुक्त शांतनु दास को मालदा (पश्चिम बंगाल) से गिरफ्तार कर लिया है।

​वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) एसटीएफ अजय सिंह ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि अल्मोड़ा निवासी एक वरिष्ठ नागरिक (महिला) ने जनवरी 2026 में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने बताया कि दिसंबर 2025 में अज्ञात साइबर ठगों ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी विभाग का अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया। ठगों ने आरोप लगाया कि पीड़िता का आधार कार्ड केनरा बैंक खाते से लिंक है, जिसमें 60 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है और उनके खिलाफ 5,000 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

​कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर अपराधियों ने पीड़िता को 12 दिनों तक व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से “डिजिटल अरेस्ट” (हाउस अरेस्ट) रखा। बैंक खातों के सत्यापन (Verification) के नाम पर डरा-धमकाकर ठगों ने पीड़िता से अलग-अलग खातों में कुल ₹1,20,18,000 स्थानांतरित करवा लिए।

तकनीकी जांच और गिरफ्तारी

​एसएसपी अजय सिंह के निर्देश पर साइबर क्राइम पुलिस टीम ने बैंक खातों, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों और व्हाट्सऐप डेटा का विश्लेषण (Meta और टेलीकॉम कंपनियों से प्राप्त डेटा) किया। जांच के दौरान पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी शांतनु दास के बैंक खाते का पता चला, जिसमें ठगी की पूरी रकम प्राप्त की गई थी। इसके बाद साइबर पुलिस टीम ने मालदा, पश्चिम बंगाल में छापेमारी कर अभियुक्त शांतनु दास (पुत्र समीर कुमार दास, निवासी ग्राम गोपालपुर, थाना इंग्लिश बाजार, जिला मालदा) को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस टीम:

कार्रवाई करने वाली टीम में निरीक्षक अरुण कुमार, उपनिरीक्षक शंकर सिंह रावत, सहायक उपनिरीक्षक सत्येंद्र गंगोला और हेड कांस्टेबल मनोज कुमार शामिल रहे।

एसएसपी अजय सिंह की आमजन से अपील:

“कोई भी सरकारी या जांच एजेंसी व्हाट्सऐप कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ या बैंक खातों के वेरिफिकेशन जैसी कार्रवाई नहीं करती है। किसी भी अंजान कॉल या फर्जी निवेश (यूट्यूब लाइक/सब्सक्राइब, टेलीग्राम इन्वेस्ट ऑफर) के झांसे में न आएं। किसी को भी अपनी व्यक्तिगत जानकारी या दस्तावेज शेयर न करें। साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।”

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