​भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाया एक और बड़ा कदम, सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी (भेल) ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को गति देने के लिए जर्मनी की प्रमुख कंपनी थाइसनक्रुप न्यूसेरा इंडिया के साथ की रणनीतिक साझेदारी, अब भारत में बनेगा ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ इलेक्ट्रोलाइज़र,

तनवीर अली हरिद्वार।

 

बीएचईएल और थाइसनक्रुप न्यूसेरा का ऐतिहासिक समझौता: भारत में अब बनेगा ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ इलेक्ट्रोलाइज़र।

 

​भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाया एक और बड़ा कदम, सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी (भेल) ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को गति देने के लिए जर्मनी की प्रमुख कंपनी थाइसनक्रुप न्यूसेरा इंडिया के साथ की रणनीतिक साझेदारी, अब भारत में बनेगा ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ इलेक्ट्रोलाइज़र,

 

 

​हरिद्वार, 07 जुलाई 2026
​भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए, सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को गति देने के लिए जर्मनी की प्रमुख कंपनी थाइसनक्रुप न्यूसेरा इंडिया के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है।
​इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत में ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए एल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइज़र प्रणाली का चरणबद्ध स्वदेशीकरण और स्थानीय स्तर पर विनिर्माण करना है। यह पहल भारत सरकार के ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

​क्या होगा इस साझेदारी से?

​स्वदेशी तकनीक: इलेक्ट्रोलाइज़र प्रणाली के स्थानीय निर्माण से विदेशी निर्भरता कम होगी और लागत में कमी आएगी।
​क्षमता विस्तार: यह समझौता बीएचईएल की परियोजना क्रियान्वयन क्षमताओं को मजबूती देगा, जिससे भविष्य में बड़ी ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना संभव होगा।

​स्वच्छ ऊर्जा की ओर कदम:

बीएचईएल अब अपनी दशकों पुरानी इंजीनियरिंग विशेषज्ञता का उपयोग स्वच्छ और हरित ऊर्जा के उभरते क्षेत्रों में कर रहा है।
​हस्ताक्षर समारोह की प्रमुख झलकियाँ
​समझौता ज्ञापन (MoU) पर बीएचईएल की ओर से कार्यकारी निदेशक (HPEP) श्री वाई श्रीनिवास राव और महाप्रबंधक (न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी) श्री सुतृप्तो डे, तथा थाइसनक्रुप न्यूसेरा इंडिया की ओर से सीईओ श्री किरण जोसेफ और निदेशक (बीडी एंड सेल्स) श्री मनीष भोसले ने हस्ताक्षर किए।

​इस अवसर पर महामहिम डॉ. फिलिप एकरमन (भारत एवं भूटान में जर्मनी के राजदूत) की गरिमामयी उपस्थिति ने दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को और अधिक सशक्त बनाया। इस दौरान बीएचईएल की निदेशक (औद्योगिक प्रणाली और उत्पाद) सुश्री बानी वर्मा और निदेशक (इंजीनियरिंग, आरएंडडी) श्री एस एम रामनाथन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

​भविष्य की राह,

​बीएचईएल का यह रणनीतिक कदम न केवल भारत के औद्योगिक परिदृश्य में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि देश को वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन के प्रमुख उत्पादक के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगा। अपनी विनिर्माण क्षमता और नवाचार के साथ, बीएचईएल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह देश की ऊर्जा आवश्यकताओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

You may have missed