डाक विभाग की लापरवाही पर स्थायी लोक अदालत का सख्त रुख: वरिष्ठ नागरिक को 20,हजार क्षतिपूर्ति देने का आदेश, 45 दिनों के भीतर करना होगा भुगतान, विभाग के तर्क पर अदालत की टिप्पणी…

तनवीर अली हरिद्वार।

डाक विभाग की लापरवाही पर स्थायी लोक अदालत का सख्त रुख: वरिष्ठ नागरिक को ₹20,000 क्षतिपूर्ति देने का आदेश, 45 दिनों के भीतर करना होगा भुगतान, विभाग के तर्क पर अदालत की टिप्पणी,

​हरिद्वार। स्थायी लोक अदालत, हरिद्वार ने डाक विभाग की सेवा में गंभीर लापरवाही और कमी पाने पर 67 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने डाक विभाग को पीड़ित को क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के रूप में कुल ₹20,000 भुगतान करने का आदेश दिया है।

​क्या था पूरा मामला?

ज्वालापुर निवासी महेश चन्द्र शर्मा ने स्थायी लोक अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी कि सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्रथम अपील की सुनवाई 18 मार्च 2025 को उपजिलाधिकारी रोशनाबाद के न्यायालय में तय थी। विभाग द्वारा इस संबंध में 6 मार्च को पंजीकृत डाक भेजी गई। ऑनलाइन ट्रैकिंग में डाक का वितरण 21 मार्च दिखाया गया, जबकि असल में यह आवेदक को 3 अप्रैल को प्राप्त हुई। समय पर सूचना न मिलने के कारण आवेदक सुनवाई में उपस्थित नहीं हो सका और उसकी अपील खारिज हो गई।

विभाग का तर्क और अदालत की टिप्पणी

डाक विभाग ने कोर्ट में स्वीकार किया कि कंप्यूटर त्रुटि और डाकिया के अवकाश पर होने के कारण गलत वितरण दर्ज हो गया था। इस पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि केवल दोषी कर्मचारी पर विभागीय कार्रवाई कर देने से डाक विभाग अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता। लोक उपयोगिता सेवाओं में जनता का विश्वास बना रहे, इसके लिए समयबद्ध और सही वितरण अनिवार्य है।

45 दिनों के भीतर करना होगा भुगतान

स्थायी लोक अदालत (वाद संख्या 37/2025) ने आवेदक के वरिष्ठ नागरिक होने और उन्हें हुए नुकसान को देखते हुए ₹10,000 क्षतिपूर्ति तथा ₹10,000 वाद व्यय (कुल ₹20,000) 45 दिनों के भीतर अदा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने डाक विभाग को यह छूट भी दी है कि वह इस राशि की भरपाई संबंधित दोषी कर्मचारी से कर सकता है।

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