तनवीर अली हरिद्वार।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, 91 वर्ष की उम्र में ली आखिरी सांस, प्रदेश में शोक की लहर,
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। वह 91 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे थे। देहरादून के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे उत्तराखंड और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
*सैन्य और राजनीतिक जीवन का सफर*
1 अक्टूबर 1934 को जन्मे बी.सी. खंडूरी ने राजनीति में कदम रखने से पहले भारतीय सेना में एक लंबा और गौरवशाली समय बिताया। उन्होंने 1954 से 1990 तक सेना के ‘कोर ऑफ इंजीनियर्स’ में अपनी सेवाएं दीं। सेना में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 1982 में ‘अति विशिष्ट सेवा पदक’ (AVSM) से भी सम्मानित किया गया था।
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति का रुख किया और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। वह पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से 5 बार लोकसभा सांसद चुने गए (10वीं, 12वीं, 13वीं, 14वीं और 16वीं लोकसभा)।
केंद्री मंत्री के रूप में स्वर्णिम कार्यकाल
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्होंने केंद्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह केंद्र सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री (स्वतंत्र प्रभार और बाद में कैबिनेट मंत्री) रहे। इसके अलावा उनके पास शहरी विकास और गरीबी उन्मूलन मंत्रालय का भी अतिरिक्त प्रभार रहा। केंद्रीय मंत्री के रूप में देश की महत्वाकांक्षी ‘स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना’ (Golden Quadrilateral Project) और राजमार्गों के विकास को धरातल पर उतारने का श्रेय उन्हें ही जाता है।
इसके बाद वे दो बार (2007-2009 और 2011-2012) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को प्रदेश में कड़े भ्रष्टाचार विरोधी फैसलों, मजबूत लोकपाल कानून के मसौदे और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए हमेशा याद किया जाता है।

नेताओं ने व्यक्त की संवेदना
उनके निधन पर प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खंडूरी जी का जाना उत्तराखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति है; उन्होंने हमेशा शुचिता और विकास की राजनीति को प्राथमिकता दी।
उनके परिवार में उनकी पुत्री और उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण और पुत्र मनीष खंडूरी हैं। खंडूरी जी का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

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