60 मुकदमों वाले कुख्यात अपराधी विनय त्यागी ने तोड़ा दम,आपसी रंजिश या गैंगवार में मारा गया विनय त्यागी?, उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी अतीक अहमद स्टाइल में हुई विनय त्यागी की हत्या, धामी सरकार का साफ संदेश, उत्तराखंड में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं, अपराध करोगे तो बचोगे नहीं, विनय को गोली मारने वाले आरोपी पुलिस की गिरफ्त में।
देवभूमि उत्तराखंड में अपराध के खिलाफ सख़्ती अब किसी से छुपी नहीं है। और शायद यही वजह है कि कुख्यात अपराधी विनय त्यागी की मौत कुछ लोगों को ज़्यादा चुभ रही है। 24 दिसंबर की रात गोली लगने के बाद उसे एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया, और शनिवार सुबह ट्रॉमा आईसीयू में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने पंचनामा शुरू कर दिया है, पोस्टमार्टम होगा यानी कानून अपनी पूरी प्रक्रिया निभा रहा है। लेकिन जनाब, कुछ लोगों को फिर भी बेचैनी है।
घटना तब हुई जब विनय को पेशी के लिए ले जाया जा रहा था और रुड़की के पास बदमाशों ने पुलिस गाड़ी पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों शूटर पकड़ लिए और जेल भेज दिए। मगर अफसोस कुछ लोगों को यह कहानी गले नहीं उतर रही। सवाल उठाए जा रहे हैं कि पकड़े गए लोगों का विनय से कोई विवाद नहीं था, तो फिर गोली किसने चलवाई? शक की सुई पुलिस पर घूम रही है। वाह! अपराधी पर शक नहीं, कानून पर शक।
उत्तर प्रदेश में अपराध करने के बाद अब कई अपराधी उत्तराखंड को “सेफ ज़ोन” समझकर यहां भाग आते हैं। लेकिन धामी सरकार ने साफ कर दिया है कि देवभूमि अब अपराधियों की शरणस्थली नहीं है। यहां भी योगी मॉडल की तरह ज़ीरो टॉलरेंस पर सख़्त कार्रवाई हो रही है चाहे वह गिरफ्तारी हो, नेटवर्क तोड़ना हो या गैंग पर शिकंजा कसना।
इसी कड़ी में विनय त्यागी पर हमला करने वाले आरोपियों को भी तुरंत पकड़ लिया गया। संदेश साफ है कोई भी कानून से खिलवाड़ करेगा, वह उत्तराखंड में भी नहीं बचेगा।
अब ज़रा विनय त्यागी की हिस्ट्री देखिए। मुजफ्फरनगर का रहने वाला, मेरठ में पला-बढ़ा और नेटवर्क उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड तक फैला। हत्या, हत्या का प्रयास, वसूली, डकैती, चोरी और ठगी जैसे करीब साठ संगीन मुकदमे। काशीपुर और दूसरे इलाकों में कई गैंगों से पैसों और डकैती को लेकर खुली दुश्मनी। यानी चलता-फिरता क्राइम एटलस।
तो ऐसे आदमी की मौत आपसी रंजिश में हो, इसमें कौन सा आश्चर्य है? लेकिन नहीं, यहां नैरेटिव बदलना ज़रूरी है। उत्तर प्रदेश में अतीक अहमद पुलिस के बीच गोली खाकर मर जाता है, तब कोई सवाल नहीं उठता। लेकिन उत्तराखंड में एक कुख्यात अपराधी मरता है, तो अचानक जांच आयोग और नैतिकता सब जाग जाते हैं।
लगता है कुछ लोगों को अपराधियों का मरना नहीं, बल्कि उत्तराखंड में कानून का मजबूत होना ज़्यादा तकलीफ दे रहा है।

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