निस्तारित मामलों में दोबारा नोटिस से उद्यमी परेशान, हरिद्वार में उपश्रमआयुक्त की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, सिडकुल के उद्योग संगठन ने श्रम आयुक्त से की निष्पक्ष जांच की मांग, सुनवाई के दौरान बाहरी व्यक्तियों के हस्तक्षेप पर उठे सवाल…

तनवीर अली हरिद्वार।

निस्तारित मामलों में दोबारा नोटिस से उद्यमी परेशान, हरिद्वार में उपश्रमआयुक्त की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, सिडकुल के उद्योग संगठन ने श्रम आयुक्त से की निष्पक्ष जांच की मांग, अनावश्यक उत्पीड़न और समय की बर्बादी का आरोप

विशेष संवाददाता / हरिद्वार

उत्तराखंड के प्रमुख औद्योगिक केंद्र सिडकुल में श्रम विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उद्योग जगत में गंभीर असंतोष व्याप्त है। सिडकुल के उद्योग संगठन ने सीधे श्रम आयुक्त को पत्र भेजकर हरिद्वार के उपश्रमआयुक्त कमल जोशी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उनके कामकाज की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि उपश्रमआयुक्त के रवैये से हरिद्वार का औद्योगिक माहौल प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहा है।

​संगठन के अनुसार, पिछले छह महीनों से तैनात उपश्रमआयुक्त द्वारा ऐसे औद्योगिक मामलों को भी दोबारा खोला जा रहा है, जिनका निपटारा पहले ही श्रम निरीक्षक या सहायक श्रम आयुक्त स्तर पर कानूनी रूप से किया जा चुका है।

अनावश्यक उत्पीड़न और समय की बर्बादी का आरोप

​उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि पूर्व में निस्तारित (Settled) हो चुके वादों में फिर से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। फैक्टरी मालिकों और मानव संसाधन (HR) प्रबंधकों को फोन कॉल करके श्रम कार्यालय बुलाया जा रहा है। वहां उनसे दोबारा पैरवी करने और संबंधित पुराने दस्तावेज प्रस्तुत करने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे औद्योगिक प्रतिष्ठानों का न केवल अनावश्यक समय और आर्थिक संसाधन नष्ट हो रहे हैं, बल्कि सिडकुल में काम का माहौल भी खराब हो रहा है।

सुनवाई के दौरान बाहरी व्यक्तियों के हस्तक्षेप पर उठे सवाल

​शिकायत पत्र में एक और गंभीर मुद्दा उठाया गया है। आरोप है कि उपश्रमआयुक्त के कक्ष में सुनवाई के दौरान निष्पक्षता के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिन मामलों में संबंधित श्रमिक खुद मौजूद नहीं रहते, वहां भी ‘तथाकथित श्रमिक नेता’ अधिकारी के कमरे में मौजूद रहते हैं और सीधे बातचीत व कार्यवाहियों में हस्तक्षेप करते हैं। इससे विभाग की सुनवाई की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

​[प्रमुख बयान]

​“निस्तारित मामलों को दोबारा खोलना गलत, निष्पक्ष जांच हो”

​“उपश्रमआयुक्त कमल जोशी के पिछले लगभग छह माह के कार्यकाल में कई फैक्टरी मालिकों और मानव संसाधन प्रबंधकों ने गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं। जो मामले श्रम निरीक्षक या सहायक श्रम आयुक्त द्वारा पहले ही निपटाए जा चुके हैं, उन्हें फिर से खोलकर नोटिस भेजे जा रहे हैं। नियोजकों को फोन करके दफ्तर बुलाया जाता है और दोबारा पैरवी व दस्तावेज देने को कहा जाता है। सुनवाई के दौरान तथाकथित श्रमिक नेताओं का अनधिकृत हस्तक्षेप रहता है। हम श्रम आयुक्त से मांग करते हैं कि पूर्व की इन कार्रवाइयों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।”

— राज अरोड़ा (प्रदेश अध्यक्ष) एवं सुयश वालिया (प्रदेश महासचिव), उद्योग संगठन

​“कार्रवाई नियमानुसार, शिकायत की जानकारी नहीं”

​“शिकायत के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। अगर इस मामले में कोई जांच होती है, तो मैं अपना पक्ष रखूंगा। रही बात किसी नोटिस या कार्यप्रणाली की, तो विभाग द्वारा सभी कार्यवाहियां पूरी तरह से नियमानुसार ही की जा रही हैं।”

— कमल जोशी, उपश्रमआयुक्त, हरिद्वार

​प्रमुख मुख्य बिंदु:

  • ​पुराने मामले खुले: पूर्व में निपटाए जा चुके वादों में फिर से जारी किए जा रहे नोटिस।
  • ​फोन पर बुलावा: HR प्रबंधकों और मालिकों को फोन कर दफ्तर बुलाकर दोबारा पैरवी का दबाव।
  • ​तृतीय पक्ष का दखल: सुनवाई के दौरान श्रमिक नेता की मौजूदगी और हस्तक्षेप पर सवाल।
  • ​जांच की मांग: संगठन ने श्रम आयुक्त से पूर्व की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की।

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