उत्तराखंड लेखपाल संघ की चेतावनी: फर्जी प्रमाण पत्र मामले में लेखपालों पर कार्रवाई के विरोध में 25 से बहिष्कार, अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल बोले– ‘AI से बने फर्जी कागजातों के लिए लेखपाल जिम्मेदार नहीं, संघ ने दी चेतावनी…

तनवीर अली हरिद्वार।

उत्तराखंड लेखपाल संघ की चेतावनी: फर्जी प्रमाण पत्र मामले में लेखपालों पर कार्रवाई के विरोध में 25 से बहिष्कार, अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल बोले– ‘AI से बने फर्जी कागजातों के लिए लेखपाल जिम्मेदार नहीं’ संघ ने दी चेतावनी…

देहरादून। जनपद देहरादून में कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों के आधार पर जारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्रों के मामले में लेखपालों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के विरोध में उत्तराखंड लेखपाल संघ खुलकर सामने आ गया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि लेखपालों पर एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई बंद न हुई तो पूरे प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में प्रमाण पत्र बनाने का काम पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

​बुधवार को लेखपाल सभागार, तहसील सदर देहरादून में उत्तराखंड लेखपाल संघ की प्रदेश कार्यकारिणी की एक आपात बैठक प्रदेश अध्यक्ष श्री देवेश घिल्डियाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में देहरादून जिला कार्यकारिणी द्वारा 25 सितंबर 2026 से समस्त प्रकार के प्रमाण पत्रों का पूर्ण बहिष्कार करने के फैसले का प्रदेश कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से समर्थन किया।

​”एक दिन में 100 आवेदन, डोर-टू-डोर सत्यापन असंभव”

​बैठक को संबोधित करते हुए संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री देवेश घिल्डियाल ने कहा कि उत्तराखंड की लगभग 60 प्रतिशत आबादी मैदानी जिलों में निवास करती है। अत्यधिक जनसंख्या घनत्व के कारण प्रत्येक लेखपाल की ऑनलाइन आईडी पर रोजाना 50 से 100 प्रमाण पत्रों के आवेदन आते हैं।

​उन्होंने स्पष्ट किया:

​”अत्यधिक कार्यभार और दो-दो क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाल रहे लेखपालों के लिए हर आवेदन का घर-घर जाकर (डोर-टू-डोर) सत्यापन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। आवेदक ऑनलाइन जो दस्तावेज अपलोड करते हैं, लेखपाल उन्हीं के आधार पर अपनी आख्या (रिपोर्ट) देने को मजबूर हैं।”

​AI से फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह पर हो कार्रवाई

​देवेश घिल्डियाल ने कहा कि आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकों का सहारा लेकर दस्तावेजों में कूट रचना (टैंपरिंग) की जा रही है। ऐसे फर्जी कागजातों के आधार पर बने प्रमाण पत्रों के लिए लेखपालों को दोषी ठहराना पूरी तरह अनुचित है।

​संघ ने मांग की है कि इस फर्जीवाड़े में शामिल आवेदकों, जन सुविधा केंद्र (CSC) संचालकों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह/माफिया के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि निष्ठापूर्वक काम कर रहे कर्मचारियों पर। यदि लेखपालों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो संपूर्ण मैदानी जिलों में बहिष्कार किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

​मीडिया से तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की अपील

​बैठक के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने कुछ समाचार पत्रों द्वारा बिना पूरे तथ्य जाने लेखपालों को मुख्य दोषी बताए जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया। प्रदेश अध्यक्ष ने मीडिया बंधुओं से अपील की कि वे मामले की तह तक जाकर और सभी तथ्यात्मक जानकारियां जुटाकर ही खबरें प्रकाशित करें।

​बैठक में ये पदाधिकारी रहे मौजूद

​आपात बैठक में प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल के अलावा:

  • प्रदेश पदाधिकारी: प्रदेश महामंत्री मेजर सिंह चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती मंजू बिष्ट, प्रदेश उपाध्यक्ष उम्मेद सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री रविंद्र दत्त सेमवाल।
  • संरक्षक व पूर्व पदाधिकारी: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष (से.नि.) हुकुमचंद पाल, पूर्व जिलाध्यक्ष (से.नि.) सगत सिंह सैनी, हीरा सिंह बिष्ट, आनंद सिंह रावत, मनोज मिश्रा, भोला सिंह, सुनील चौधरी, रिजवान हसन।
  • जिला प्रतिनिधि: जिलाध्यक्ष देहरादून जयपाल सिंह रावत, जिलाध्यक्ष हरिद्वार सुंदर सिंह तोमर, जिला मंत्री उधम सिंह नगर श्रीमती इंदु भट्ट सहित कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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