कोविड-19 के दौरान इस्तेमाल हुई गाड़ियों का 4 साल भी भुगतान नही होने पर…महिंद्रा टैक्सी व मैक्सी कैब मालिक कल्याण समिति से जुड़े ट्रैवल्स कारोबारियों का प्रतिनिधिमंडल मिला डीएम से…. 1.15 करोड़ रुपए भुगतान का जल्द करने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन…जिला अधिकारी ने जल्द भुगतान दिलाने का दिया आश्वासन…..

तनवीर अली हरिद्वार।

हरिद्वार: कोविड- 19 के दौरान मरीजों को लाने ले जाने में इस्तेमाल हुई गाड़ियों का 1.15 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान चार साल बाद भी नहीं हो पाया है। गुरुवार को महिंद्रा टैक्सी व मैक्सी कैब मालिक कल्याण समिति के बैनर तले ट्रैवल्स कारोबारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे। कारोबारियों ने भुगतान न होने से आ रही कठिनाइयों से अवगत कराते हुए जल्द से जल्द भुगतान की मांग की और ज्ञापन सौंपा। वहीं, प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में शासन को डिमांड भेजी जा चुकी है।
कोरोना काल में कोविड के मरीजों को अस्पताल लाने ले जाने से लेकर राहत व बचाव कार्यों के लिए प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य महकमों ने निजी गाड़ियां किराये पर ली थी। महीनों तक काम लेने के बाद कुछ भुगतान कर दिया गया। लेकिन 1.15 करोड़ रुपये का भुगतान साल 2020 से अभी तक नहीं हो पाया है। जिस कारण ट्रैवल्स कारोबारियों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। कई कारोबारी तो अपनी गाड़ियों का टैक्स तक नहीं भर पा रहे हैं। जिससे गाड़ियां खड़ी होने की नौबत आ गई है। इस बारे में कई बार पत्राचार के बावजूद भुगतान न होने पर गुरुवार को महिंद्रा टैक्सी व मैक्सी कैब मालिक कल्याण समिति के बैनर तले हरिद्वार जिले से लेकर देहरादून, छुटमलपुर सहारनपुर तक के ट्रैवल्स कारोबारी इकट्टा होकर जिलाधिकारी से मिलने रोशनाबाद पहुंचे। यहां जिलाधिकारी के नाम अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन देते हुए हाजी कुर्बान, हाजी कासिम अंसारी, पुनीत कुमार, संदीप सैनी आदि ने बताया कि भुगतान न होने से कारोबारियों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए जल्द भुगतान किया जाए। इस दौरान हरिद्वार, ज्वालापुर, रुड़की, लक्सर, देहरादून, छुटमलपुर आदि जगहों से अमित सैनी, अनीस अहमद, कुर्बान मलिक, सतपाल, संजय कुमार, कुर्बान पठान, एजाज अहमद, नितिन यादव, विनीत शर्मा, राव रिहान अकरम, अब्दुल सुब्हान अंसारी, अंबरीश कुमार सैनी आदि ने भुगतान की मांग की। वहीं, जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल का कहना है कि इस संबंध में शासन को डिमांड भेजी जा चुकी है। बिलों के सत्यापन के लिए एक टीम भी गठित की गई है। सत्यापन के बाद शासन को भेजे जाएंगे। बजट आने पर भुगतान कर दिया जाएगा।

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