उत्तराखण्ड पुलिस का बड़ा एक्शन: बाल यौन शोषण के खिलाफ साइबर स्टिंग, 2026 में अब तक 150 मुकदमे दर्ज, एसटीएफ और साइबर सेल की तकनीकी निगरानी से नैनीताल में बड़ा खुलासा, डार्क वेब और डिस्कोर्ड के जरिए सामग्री डाउनलोड करने वाला आरोपी रडार पर, अधिकारियों के कड़े निर्देश: आईजी एसटीएफ और एसएसपी के मार्गदर्शन में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए लगातार चल रहा है विशेष अभियान…

तनवीर अली हरिद्वार।

उत्तराखण्ड पुलिस का बड़ा एक्शन: बाल यौन शोषण के खिलाफ साइबर स्टिंग, 2026 में अब तक 150 मुकदमे दर्ज

​– एसटीएफ और साइबर सेल की तकनीकी निगरानी से नैनीताल में बड़ा खुलासा, डार्क वेब और डिस्कोर्ड के जरिए सामग्री डाउनलोड करने वाला आरोपी रडार पर

​– अधिकारियों के कड़े निर्देश: आईजी एसटीएफ और एसएसपी के मार्गदर्शन में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए लगातार चल रहा है विशेष अभियान

​देहरादून/हल्द्वानी:

उत्तराखण्ड पुलिस ने बालकों के ऑनलाइन यौन शोषण और अश्लील सामग्री के प्रसार के खिलाफ एक बड़ा और प्रभावी अभियान छेड़ रखा है। पुलिस महानिरीक्षक (IG) एसटीएफ/साइबर उत्तराखण्ड और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) एसटीएफ के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) साइबर शान्तनु पराशर के पर्यवेक्षण में एसटीएफ की साइबर टेक्निकल टीम लगातार अपराधियों पर शिकंजा कस रही है। एनसीएमईसी (NCMEC/CyberTipline) और एनसीआरपी (NCRP) से प्राप्त गोपनीय सूचनाओं के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर वर्ष 2026 में अब तक राज्य भर में लगभग 150 अभियोग पंजीकृत किए जा चुके हैं।

​नैनीताल में हुआ बड़ा खुलासा: डार्क वेब और डिस्कोर्ड का इस्तेमाल

​इसी कड़ी में जनपद नैनीताल के हल्द्वानी क्षेत्र में एक गंभीर मामला सामने आया है। एनसीआरपी के माध्यम से 25 अक्टूबर 2026 को प्राप्त 11 शिकायतों के आधार पर कोतवाली हल्द्वानी में मु0अ0सं0 373/2026, पॉक्सो एक्ट (धारा 14/15) और आईटी एक्ट (धारा 67B) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

​जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी डार्क वेब (Dark Web) और डिस्कोर्ड (Discord) के माध्यम से बाल यौन शोषण से जुड़ी अवैध सामग्री डाउनलोड कर रहा था। यही नहीं, तकनीकी जांच में एक विधि विवादित किशोर द्वारा स्वयं भी एक बालक के साथ अश्लील कृत्य करते हुए वीडियोग्राफी किए जाने के वीडियो भी प्रकाश में आए हैं।

​भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद

​विवेचना के दौरान पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के पास से कई संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ​दो रियलमी मोबाइल फोन (मॉडल RMX5256 एवं RMX3844)
  • ​एक लेनोवो टैबलेट (मॉडल TB-8505X)
  • ​एक एचपी (HP) लैपटॉप
  • ​एक ओप्पो मोबाइल फोन का खाली डिब्बा

​फॉरेंसिक और तकनीकी जांच के दौरान लैपटॉप की एक ड्राइव में ‘TIME’ नामक फोल्डर से कई आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें बरामद हुईं। इसके अलावा, ब्रेव (Brave) और गूगल क्रोम ब्राउजर की सर्च हिस्ट्री, डाउनलोड हिस्ट्री और रीसायकल बिन से भी बाल यौन शोषण से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। क्रोम ब्राउजर में लॉग-इन तीन ई-मेल आईडी की भी गहनता से जांच की जा रही है, जिनका संबंध CyberTipline की शिकायतों से पाया गया है।

​अधिकारियों का संदेश और पुलिस की अपील

​“बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण और साइबर अपराधियों से सुरक्षित रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। एसटीएफ की टेक्निकल टीम लगातार ऐसे तत्वों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और संबंधित जनपदों के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।”

— पुलिस महानिरीक्षक (IG), एसटीएफ उत्तराखण्ड

​उत्तराखण्ड पुलिस की आमजन से अपील:

पुलिस प्रशासन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति पूरी तरह सजग रहें। बाल यौन शोषण से संबंधित किसी भी प्रकार की अवैध सामग्री को न तो डाउनलोड करें, न संग्रहित करें और न ही सोशल मीडिया पर साझा करें। यदि आपको ऐसी कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत इसकी सूचना उत्तराखण्ड पुलिस या साइबर सेल को दें।

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